जय जिनेन्द्र 🙏अभी खुला है, १०:०० pm बजे बंद होगा
शुद्ध आहार का दान, चारों दानों में प्रथम एवं सर्वाधिक प्रशंसित।
पर्व के दिन संघ हेतु सात्विक भोजन का प्रायोजन।
जैन दर्शन में आहार दान को चारों दानों में प्रथम माना गया है, क्योंकि यह उस शरीर का पोषण करता है जो प्रत्येक अन्य साधना को संभव बनाता है। मुनि, साधु अथवा सहधर्मी को शुद्ध हृदय से एवं बिना किसी प्रतिफल की आशा के दिया गया भोजन दाता हेतु महान पुण्य अर्जित करता है, ऐसा माना जाता है। इस क्षेत्र पर आहार दान व्यावहारिक रूप में पर्व दिवसों पर यात्रियों एवं आगंतुक संघ हेतु महाप्रसाद के प्रायोजन का रूप लेता है।
पृष्ठभूमि पढ़िए
जैन आहारइस दान के विषय में कोई प्रश्न हो तो नीचे दिए क्रमांकों पर ट्रस्ट कार्यालय उपलब्ध है।